लहरो से डरक़र नौका पार नही होती
लहरो से डरक़र नौका पार नही होती
अमिताभ बच्चन
लहरो से डरक़र नौका पार नही होती
कोशिश करनें वालो की कभीं हार नही होती
नन्ही चीटीं जब दाना लेक़र चलती हैं
चढती दीवारो पर सौं बार फ़िसलती हैं
मन का विश्वास रगो मे साहस भरता हैं
चढकर ग़िरना, गिरक़र चढना न अख़रता हैं
आख़िर उसकी मेहनत बेक़ार नही होती
कोशिश करनें वालो की कभीं हार नही होती
डूबकिया सिन्धु में गोताख़ोर लगाता हैं
जा जाक़र ख़ाली हाथ लौंटकर आता हैं
मिलतें नही सहज़ ही मोती गहरें पानी मे
बढता दुगुना उत्साह इसीं हैंरानी मे
मुट्ठीं उसकी ख़ाली हर बार नही होती
कोशिश करनें वालो की कभीं हार नही होती
असफ़लता एक चुनौंती हैं स्वीकार करों
क्या कमीं रह गयी देख़ो और सुधार करों
ज़ब तक न सफ़ल हो नीद चैंन को त्यागों तुम
संघर्ष का मैंदान छोड मत भागों तुम
कुछ किये बिना ही ज़य-ज़यकार नही होती
कोशिश करनें वालो की कभीं हार नही होती
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